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चाणक्य मालिका पे चिंतन

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  उत्तम विचारपूर्वक निर्मित, उच्च मूल्यों से बंधी सहज संरचना, नटोंकी मूल्यों पर श्रद्धा जो संवाद प्रदर्शन मे बल दर्शाती हैं, प्रत्येक वाक्य पात्र को दर्शकों द्वारा मूल्यहीन ना लिया जाए ऐसे, प्रमुख पात्रों मे पत्थर की लकीर सा भारत प्रेम और व्यक्तित्व में घुला हुआ अभय, संगीत ऐसा जो मुर्दे को भावानाओंका परिचय दे, ऐसी मलिका जो पैड की पत्तों और शाखाओं को बीज की परख देती हैं। प्रेम, सत्य, मित्रता, सुव्यवस्था, निर्भयता, विवेक, राष्ट्रप्रेम, शिक्षक शिक्षा और राष्ट्र निर्माण मे उनका सामर्थ्य, निस्वार्थ भाव रखने की सकारण प्रेरणा,  स्वमान, परमान और सबसे महत्वपूर्ण "स्वतंत्र", अत्याचार और अन्याय के खिलाफ विद्रोह की ताकत और दया चरित्र इन मूल्यों पे खड़ी की हुई रचना जो हर राष्ट्र प्रेमी की साधना का नमूना और प्रेरणा है। अगर चिंगारी हो तुम तो स्वभाव की लपटे क्या है और विवेक क्या है यहां पता कर लो ! अगर मुंजा हुआ दीया हो तो यहा हैं खुद को जलाने की ज्वाला ।

संक्षिप्त लिखान

 शरीर की जरूरते हमारी जरूरत नहीं होंगी लेकिन शरीर हमारी जरूरत है | मन की जरूरत हमारी जरूरत नहीं लेकिन मन हमारी जरूरत है | हमारी जरूरत की पहेचान यही की मन शरीर की जरूरत से हमें मतलब नहीं |